सोरायसिस से जूझ रही हैं उतरन की रश्मि देसाई

अगर ये सवाल आपसे कुछ साल पहले कोई पूछता तो शायद आप कहते, 'उतरन' सीरियल की तपस्या-तप्पू वाली रश्मि देसाई...?

कई बार धारावाहिकों के कुछ किरदार इस क़दर मशहूर हो जाते हैं कि वही उन कलाकारों की असली पहचान बन जाती है.

रश्मि देसाई के लिए 'उतरन' वही सीरियल था. उसके मुख्य किरदार के तौर पर लोग आज भी उन्हें जानते और पहचानते हैं. इसके बाद रश्मि कुछ एक और धारावाहिकों में नज़र आईं, कुछ रिएलिटी शो भी किए लेकिन वो जादू दोबारा नहीं चल सका.

और अब रश्मि एक लंबे समय से पर्दे से ग़ायब भी हैं...हालांकि टीवी जगत में जहां हर रोज़ कुछ नए धारावाहिकों के साथ दर्जन भर नए चेहरे आते हों वहां कोई एक कलाकार लंबे समय से नज़र नहीं आए तो पता भी नहीं चलता.

लेकिन बीते कुछ दिनों से रश्मि एक बार फिर चर्चा में है पर वजह कोई सीरियल या कंट्रोवर्सी नहीं बल्कि उनकी बीमारी है.

रश्मि देसाई सोरायसिस नाम की बीमारी से जूझ रही हैं.

बहुत हद तक संभव है कि आपने इस बीमारी के बारे में सुना भी न हो, लेकिन रश्मि ने बताया कि वो पिछले एक साल से इस बीमारी से पीड़ित हैं.

सोरायसिस त्वचा से जुड़ी एक बीमारी है. जो अमूमन किसी भी उम्र में सकती है.

क्या है सोरॉसिस?

अमरीका के नेशनल सोरायसिस फ़ाउंडेशन के मुताबिक, इसमें त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ने शुरू हो जाते हैं. आमतौर पर इसका असर सबसे ज्यादा कोहनी के बाहरी हिस्से और घुटने पर देखने को मिलता है.

वैसे इसका असर शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकता है. कुछ पीड़ितों का कहना है कि सोरायसिस में जलन भी होती है और खुजली भी. सोरायसिस का संबंध कई ख़तरनाक बीमारियों मसलन, डायबिटीज़, दिल से जुड़ी बीमारियों और अवसाद से भी है.

नेशनल सोरायसिस फ़ाउंडेशन के मुताबिक़, अगर शरीर में कहीं भी लाल चकत्ते नज़र आ रहे हैं तो बिना पूछे-जांचे, दवा लेना ख़तरनाक हो सकता है. डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है क्योंकि ये सोरायसिस की शुरुआत हो सकती है.

अमरिकन अकेडमी ऑफ़ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, यह बीमारी ज़्यादातर गोरे लोगों में होती है. लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल भी नहीं कि ये सांवले लोगों को नहीं हो सकती.

नेशनल सोरायसिस फ़ाउंडेशन के अनुसार, वैज्ञानिकों को अभी भी इसकी असल वजह के बारे में पता नहीं है लेकिन जो पता है उसके मुताबिक़ इम्यून सिस्टम और आनुवांशिक कारणों के चलते ये बीमारी किसी को भी हो सकती है.

लेकिन ये संक्रामक बीमारी नहीं है.

अमेरिकन अकेडमी ऑफ़ डर्मेटोलॉजी के अनुसार इसके अलावा स्वीमिंग पूल में नहाने, किसी सोरायसिस पीड़ित के साथ संपर्क से और किसी सोरायसिस पीड़ित के साथ शारीरिक संबंध बनाने से भी यह नहीं फैलता है.

आमतौर पर हम शरीर में खुजली और चकत्ते देखकर अनदेखा कर देते हैं. सोचते हैं कोई इंफ़ेक्शन हो गया है. तो पहले तो ऐसा करना छोड़ना होगा. इसके लिए कोई अलग से ब्लड टेस्ट नहीं होता है लेकिन किसी विशेषज्ञ को संपर्क कर सकते हैं.

कई बार विशेषज्ञ उस हिस्से का स्किन सैंपल ले लेते हैं और माइक्रोस्कोप से जांच करते हैं.

इसके अलावा अगर आपके घर में किसी को सोरायसिस की शिकायत रह चुकी है तो पहले से ही सतर्क रहें और अगर ऐसा कोई भी निशान नज़र आए या चमड़ी खुरदुरी और मोटी लगे जो जांच करा लें.

सोरायसिस का इलाज आमतौर पर इस बीमारी को बढ़ने से रोकता है और इससे सोरायसिस नियंत्रण में रहता है. इसका इलाज तीन चरणों में होता है...

रश्मि भी कहती हैं कि लाइफ़स्टाइल की वजह से वो शुरुआती वक़्त में उतना ध्यान नहीं दे सकीं जितना ज़रूरी था. इसका एक असर ये भी हुआ कि वज़न भी बढ़ गया.

डॉक्टर भी मानते हैं कि सोरायसिस के लिहाज़ से सबसे ज़रूरी है कि हम अपना ख्याल रखें. शुरुआती ध्यान से इसे बढ़ने से रोका जा सकता है.

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