क्या नाश्ता करना सचमुच फ़ायदेमंद होता है?
पुरानी कहावत है-सुबह का नाश्ता राजा की तरह, दोपहर का खाना राजकुमार की तरह और रात का भोजन भिखारी की तरह का होना चाहिए.
मतलब ये कि सुबह का नाश्ता भरपूर होना चाहिए. इससे आप को दिन भर दिमाग़ी और शारीरिक मेहनत के लिए ऊर्जा मिल जाती है. नाश्ता न करना एशिया से लेकर अमरीका तक सेहत के लिए बुरा माना जाता है. जबकि दुनिया में बड़ी तादाद में ऐसे लोग हैं, जो सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं.
तीन चौथाई अमरीकी ही नियमित रूप से सुबह का नाश्ता करते हैं. वहीं, केवल दो तिहाई ब्रिटिश नागरिक नियमित रूप से सुबह का नाश्ता करते हैं.
ब्रेकफ़ास्ट यानी रात भर भूखे रहने के सिलसिले को ब्रेक करना. हमारा शरीर रात में बदन में संचित ऊर्जा का इस्तेमाल शरीर के विकास और पुनर्निर्माण में करता है.
ब्रितानी डायटीशियन सारा एल्डर कहती हैं, ''संतुलित नाश्ता करने से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है. इससे हमें शरीर के विकास के लिए ज़रूरी प्रोटीन और कैल्शियम मिलते हैं.''
क्या सच में नाश्ता इतना ज़रूरी है?
पर, अब विशेषज्ञों के बीच इस बात पर गहरे मतभेद उभर रहे हैं कि नाश्ते को इतनी अहमियत दी जाए या नहीं.
हाल के दिनों में भूखे रहने का चलन बढ़ा है. फिर सुबह के नाश्ते में खाए जाने वाले डिब्बाबंद सेरेल्स में बहुत चीनी होने को भी लोग सेहत के लिए नुक़सानदेह मानते हैं. एक रिसर्च ने तो सुबह के नाश्ते को ख़तरनाक तक करार दे दिया है.
तो, आख़िर सच क्या है? क्या दिन की शुरुआत करने के लिए नाश्ता ज़रूरी है? या फिर सुबह के नाश्ते के लिए सेरेल्स बेचने वाली कंपनियों की ये साज़िश है?
सुबह के नाश्ते को लेकर जो रिसर्च सबसे ज़्यादा होती है वो है इसके मोटापे से ताल्लुक़ की. वैज्ञानिकों की इस बारे में अलग-अलग थ्योरी हैं.
अमरीका में 50 हज़ार से ज़्यादा लोगों पर हुई रिसर्च कहती है कि जो लोग सुबह भारी-भरकम नाश्ता करते हैं, उनका बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स संतुलित रहता है.
इनके मुक़ाबले रात में देर से खाना खाने वालों का बीएमआई ज़्यादा निकला. रिसर्चर कहते हैं कि नाश्ता करने से आप तसल्ली महसूस करते हैं. आपकी रोज़ाना की कैलोरी की खपत कम होती है.
नाश्ते से हमारा खान-पान भी बेहतर होता है. सुबह के नाश्ते की चीज़ें अक्सर रेशे वाली और पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं. इससे बाद के खानों को लेकर इंसुलिन की संवेदनशीलता भी बढ़ती है. ये डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए जोखिम भरा हो सकता है.
मतलब ये कि सुबह का नाश्ता भरपूर होना चाहिए. इससे आप को दिन भर दिमाग़ी और शारीरिक मेहनत के लिए ऊर्जा मिल जाती है. नाश्ता न करना एशिया से लेकर अमरीका तक सेहत के लिए बुरा माना जाता है. जबकि दुनिया में बड़ी तादाद में ऐसे लोग हैं, जो सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं.
तीन चौथाई अमरीकी ही नियमित रूप से सुबह का नाश्ता करते हैं. वहीं, केवल दो तिहाई ब्रिटिश नागरिक नियमित रूप से सुबह का नाश्ता करते हैं.
ब्रेकफ़ास्ट यानी रात भर भूखे रहने के सिलसिले को ब्रेक करना. हमारा शरीर रात में बदन में संचित ऊर्जा का इस्तेमाल शरीर के विकास और पुनर्निर्माण में करता है.
ब्रितानी डायटीशियन सारा एल्डर कहती हैं, ''संतुलित नाश्ता करने से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है. इससे हमें शरीर के विकास के लिए ज़रूरी प्रोटीन और कैल्शियम मिलते हैं.''
क्या सच में नाश्ता इतना ज़रूरी है?
पर, अब विशेषज्ञों के बीच इस बात पर गहरे मतभेद उभर रहे हैं कि नाश्ते को इतनी अहमियत दी जाए या नहीं.
हाल के दिनों में भूखे रहने का चलन बढ़ा है. फिर सुबह के नाश्ते में खाए जाने वाले डिब्बाबंद सेरेल्स में बहुत चीनी होने को भी लोग सेहत के लिए नुक़सानदेह मानते हैं. एक रिसर्च ने तो सुबह के नाश्ते को ख़तरनाक तक करार दे दिया है.
तो, आख़िर सच क्या है? क्या दिन की शुरुआत करने के लिए नाश्ता ज़रूरी है? या फिर सुबह के नाश्ते के लिए सेरेल्स बेचने वाली कंपनियों की ये साज़िश है?
सुबह के नाश्ते को लेकर जो रिसर्च सबसे ज़्यादा होती है वो है इसके मोटापे से ताल्लुक़ की. वैज्ञानिकों की इस बारे में अलग-अलग थ्योरी हैं.
अमरीका में 50 हज़ार से ज़्यादा लोगों पर हुई रिसर्च कहती है कि जो लोग सुबह भारी-भरकम नाश्ता करते हैं, उनका बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स संतुलित रहता है.
इनके मुक़ाबले रात में देर से खाना खाने वालों का बीएमआई ज़्यादा निकला. रिसर्चर कहते हैं कि नाश्ता करने से आप तसल्ली महसूस करते हैं. आपकी रोज़ाना की कैलोरी की खपत कम होती है.
नाश्ते से हमारा खान-पान भी बेहतर होता है. सुबह के नाश्ते की चीज़ें अक्सर रेशे वाली और पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं. इससे बाद के खानों को लेकर इंसुलिन की संवेदनशीलता भी बढ़ती है. ये डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए जोखिम भरा हो सकता है.
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