इस्लामिक स्टेट ने एक मस्जिद तबाह कर खोल दिया 3000 साल पुराना राज़
यहां पर सदियों से इबादत होती रही है. ईसाई धर्म के शुरुआती दिनों में यहां पर एक मठ भी बनाया गयाथा. पर, क़रीब 600 साल पहले इस ईसाई मठ को मुस्लिम इबादतगाह में तब्दील कर दिया गया. इस इबादतगाह को पैग़म्बर यूना को समर्पित किया गया.
इस धमाके के वीडियो का प्रसारण पूरी दुनिया में दिखाया गया था. इस्लामिक स्टेट का संदेश साफ़ था: भले ही कोई जगह कितनी भी पवित्र हो, कितनी भी पूजनीय क्यों न हो, वो इस्लामिक स्टेट की क़ुरान की कट्टरपंथी व्याख्या की ज़द से परे नहीं थी.
लेकिन, नबी यूनुस की बर्बादी से इस प्राचीन और पवित्र माने जानेवाले टीले की कहानी ख़त्म नहीं हुई. इसके बजाय इस तबाही ने बड़े दिलचस्प सवाल को जन्म दिया कि आख़िर उस मस्जिद की संग-ए-बुनियाद के नीचे आख़िर क्या है?
2018 के बसंत के मौसम में बीबीसी अरबी सर्विस की तरफ़ से एक टीम को नबीयू नुस भेजी गई. हाल ही में वहां पर पहाड़ी के अंदर कुछ सुरंगें मिली थीं. बीबीसी की टीम वहां ये पता लगाने गई कि आख़िर इस घुमावदार, पेचीदा और धूल भरी सुरंगों की हक़ीक़त क्या है.
बीबीसी की टीम ने नबी यूनुस के उस पहाड़ी इलाक़े की हाई रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें खींचीं. इन तस्वीरों को उतारने के लिए फोटोग्रामेटरीनाम की तकनीक का इस्तेमाल किया गया. बीबीसी की टीम ने नबी यूनुस के रहस्य और उन अनसुलझे सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश की, जो इस मस्जिद की तबाही के बाद से उठ रहे हैं. मगर, जिनके जवाब अब तक नहीं मिले हैं.
नबी यूनुस की पहाड़ी एक दौर में असीरियाई साम्राज्य की राजधानी और अपने दौर के मशहूर शहर निनेवेह के क़रीब हुआ करती थी. पैग़म्बर यूना को अरबी ज़बान में नबी यूनुस कहा जाता है. पैग़म्बर यूना या यूनुस का ज़िक्र क़ुरान में भी मिलता है और हिब्रू भाषा में लिखी गई बाइबिल में भी.
दोनों ही पवित्र किताबों में यूनुसया योना के निनेवेह शहर जाने और वहां के बाशिंदों को ये चेतावनी देने का ज़िक्र है कि शहर के लोग अपने पापों का प्रायश्चित कर लें, अपनी हरकतें सुधार लें. वरना निनेवेह शहर की तबाही तय है.
बहुत से मुसलमान मानते हैं कि पैग़म्बर यूनुस की हड्डियां, नबी यूनुस में रखी हुई थीं. बाद में वहां पर एक दरगाह भी बना दी गई. मान्यता है कि यहां पर उस व्हेल का दांत भी रखा हुआ था, जो लोक कथाओं के मुताबिक़ हज़रत यूनुस को पेट में लेकर तीन दिनों तक तैरती रही थी.
इस धमाके के वीडियो का प्रसारण पूरी दुनिया में दिखाया गया था. इस्लामिक स्टेट का संदेश साफ़ था: भले ही कोई जगह कितनी भी पवित्र हो, कितनी भी पूजनीय क्यों न हो, वो इस्लामिक स्टेट की क़ुरान की कट्टरपंथी व्याख्या की ज़द से परे नहीं थी.
लेकिन, नबी यूनुस की बर्बादी से इस प्राचीन और पवित्र माने जानेवाले टीले की कहानी ख़त्म नहीं हुई. इसके बजाय इस तबाही ने बड़े दिलचस्प सवाल को जन्म दिया कि आख़िर उस मस्जिद की संग-ए-बुनियाद के नीचे आख़िर क्या है?
2018 के बसंत के मौसम में बीबीसी अरबी सर्विस की तरफ़ से एक टीम को नबीयू नुस भेजी गई. हाल ही में वहां पर पहाड़ी के अंदर कुछ सुरंगें मिली थीं. बीबीसी की टीम वहां ये पता लगाने गई कि आख़िर इस घुमावदार, पेचीदा और धूल भरी सुरंगों की हक़ीक़त क्या है.
बीबीसी की टीम ने नबी यूनुस के उस पहाड़ी इलाक़े की हाई रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें खींचीं. इन तस्वीरों को उतारने के लिए फोटोग्रामेटरीनाम की तकनीक का इस्तेमाल किया गया. बीबीसी की टीम ने नबी यूनुस के रहस्य और उन अनसुलझे सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश की, जो इस मस्जिद की तबाही के बाद से उठ रहे हैं. मगर, जिनके जवाब अब तक नहीं मिले हैं.
नबी यूनुस की पहाड़ी एक दौर में असीरियाई साम्राज्य की राजधानी और अपने दौर के मशहूर शहर निनेवेह के क़रीब हुआ करती थी. पैग़म्बर यूना को अरबी ज़बान में नबी यूनुस कहा जाता है. पैग़म्बर यूना या यूनुस का ज़िक्र क़ुरान में भी मिलता है और हिब्रू भाषा में लिखी गई बाइबिल में भी.
दोनों ही पवित्र किताबों में यूनुसया योना के निनेवेह शहर जाने और वहां के बाशिंदों को ये चेतावनी देने का ज़िक्र है कि शहर के लोग अपने पापों का प्रायश्चित कर लें, अपनी हरकतें सुधार लें. वरना निनेवेह शहर की तबाही तय है.
बहुत से मुसलमान मानते हैं कि पैग़म्बर यूनुस की हड्डियां, नबी यूनुस में रखी हुई थीं. बाद में वहां पर एक दरगाह भी बना दी गई. मान्यता है कि यहां पर उस व्हेल का दांत भी रखा हुआ था, जो लोक कथाओं के मुताबिक़ हज़रत यूनुस को पेट में लेकर तीन दिनों तक तैरती रही थी.
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